भ्रष्टाचार का बड़ा गठजोड़:किंशुक की ठेकेदार फर्म को कई निकायों के सीएमओ का साथ, माल सप्लाय और कमीशन में भी था हिस्सा
 

कुलदीप किंशुक के मकान से लोकायुक्त को बड़ी मात्रा में साेना-चांदी के जेवर और नकदी मिली।
सुबह 6 बजे लोकायुक्त ने छापा मारा...तब शराब पार्टी के बाद किंशुक के घर ही सो रहे थे पोलायकलां व महिदपुर सीएमओ
1600 रुपए से नौकरी की शुरुआत, अब 34 हजार वेतन...लेकिन रुतबा ऐसा था
सीएमओ के रूप- साहूकार (ब्याज पर कर्जा देता), ठेकेदार (कई फर्म), व्यापारी (हॉस्टल और होटल की तैयारी), बिल्डर (मल्टी बन रही), मकान मालिक (किराए पर कमरे) और किसान (खेती करता है)

बड़नगर नगर पालिका सीएमओ कुलदीप किंशुक तृतीय श्रेणी कर्मचारी होते क्लॉस टू अफसर बनकर अब तक कैसे नौकरी करता रहा बड़ा सवाल है। शाजापुर, आलोट से लेकर तराना के बाद बड़नगर में भी कुलदीप सीएमओ के पद पर ही काबिज हुआ। जिम्मेदारों के पास इस सवाल का जवाब नहीं है। संभागायुक्त आनंद शर्मा इतना ही बोले कि इस बारे में मुझसे मत पूछो। जिम्मेदारों की यहीं चुप्पी का नतीजा है कि मात्र 1600 रुपए की नौकरी से कैरियर की शुरुआत करने वाले कुलदीप ने महज 12 साल में शासन से 22 लाख रुपए वेतन कमाया लेकिन जो काली कमाई कि वह सभी को हैरान करने वाली है।

लोकायुक्त की टीम सीएमओ कुलदीप के करोड़पति बनने की जांच में 14 घंटे से अधिक समय तक जुटी, तब जाकर पता चला कि वह खुद ही सीएमओ व ठेकेदार भी है। दस्तावेजों में विनायक ट्रेडिंग कंपनी के दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि उसने दोस्त मुकेश परमार के नाम पर कंपनी बनाई है लेकिन बैंक पासबुक व चेक में कुलदीप का ही नाम है। विनायक ट्रेडिंग के नाम से पांच लाख का कैंसिल चेक भी जब्त किया जिसमें कुलदीप के साइन है। लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसी कई फर्म दोस्त,परिचित व रिश्तेदारों के नाम पर मिली है। इंदौर के बारोली में स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में सात खाते पता चले है।


अपने राजनीतिक संबंधों को भी भुनाता रहा, इसी से आगे बढ़ा

कुलदीप का ससुराल गुना में है। उसके ससुर राघोगढ़ के नेताजी से जुड़े हुए हैं। ससुर का कोयले का कोराबार है, इसलिए कुलदीप को राजनीतिक पहुंच का फायदा मिल रहा। प्रभारी सीएमओ के पद पर वह सालों से काबिज है। बड़नगर नगर पालिका में सीएमओ बनाए जाने को लेकर यह बात भी सामने आई कि उसे विधायक मुरली मोरवाल ले गए थे। कुलदीप उनका रिश्तेदार है। हालांकि माेरवाल का कहना था कि सीएमओ मेरे समाज का है लेकिन मेरा रिश्तेदार नहीं है और न मैंने पोस्टिंग कराई है। वह पहले आलोट में इसी पद पर था।


सीएमओ की भ्रष्टाचार में चेन बन गई, साथ में शराब पार्टी करने वाले दोनों सीएमओ भी निलम्बित

लोकायुक्त के छापे के पूर्व सोमवार रात को शाजापुर पोलायकला सीएमओ वीरेंद्र मेहता व महिदपुर सीएमओ प्रदीप शास्त्री ने कुलदीप के माकड़ौन स्थित घर पर शराब पार्टी की। इसमें सीएमओ कुलदीप का दोस्त मुकेश परमार भी शामिल था। सुबह छापे के बाद दोस्त व दोनों सीएमओ तत्काल निकल गए लेकिन उन पर भी निलंबन की गाज गिर गई। लोकायुक्त को जांच में यह भी चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी कि कुलदीप के करोड़पति बनने के पीछे एक बड़ी चेन है। अन्य नगर पालिका व नगर परिषद के सीएमओ भी कुलदीप से जुड़े हुए है। आपसी सांठगाठ के चलते वे आपस में सप्लाय व निर्माण के काम भी खुद ही अपने बनाई फर्मों से करवाते है। लोकायुक्त टीम इस दिशा में भी जुट गई है। अन्य कई सीएमओ भी फसें
2 करोड़ से अधिक की संपत्ति और मिलने की संभावना

लोकायुक्त पुलिस को जांच में यह पता चला है कि कुलदीप ब्याज पर भी पैसा चलाता है। जो लोग ब्याज में फंस जाते है उनकी जमीन भी खरीदने का पता चला है जिसकी जांच की जा रही है। बुधवार को शेष 40 बैंक खाते समेत अन्य बिंदुओं पर जांच होगी। संभावना है कि दो करोड़ के लगभग की संपत्ति और उजागर हो सकती है।

कार्रवाई करने गई टीम को लौटना पड़ा था

बताते हैं कि विवेकानंद कॉलोनी में वह चार मंजिला हॉस्टल बनवा रहा है। जिसमें जी प्लॅस टू की अनुमति लेकर जी प्लस फोर तक निर्माण कर लिया। नगर निगम की टीम पिछले साल पड़ोसी की शिकायत पर निर्माण तोड़ने गई थी लेकिन बताते है कि बैरंग लौटना पड़ा था।


दो माह से चल रही थी छापे की तैयारी- जमीन-मकान से नजर में आया, ग्रामीण बनकर भी गए थे अफसर
लोकायुक्त निरीक्षक राजेंद्र वर्मा का कहना था कि उनके कार्यकाल का यह पहला छापा है। जिसके लिए गोपनीय शिकायत के बाद दो महीने से तैयारी की जा रही थी। तीन दिन पूर्व ग्रामीण बन बड़नगर में सीएमओ कुलदीप से मिलने के बहाने पहुंचा था लेकिन उसके ड्राइवर ने मुझे यह कहते हुए भगा दिया कि साहब हर किसी से नहीं मिलते है, बाद में आना। इस तरह बड़नगर, माकड़ौन, तराना, आलोट तक जानकारी जुटाने के बाद एकसाथ कार्रवाई की गई। इधर, वर्मा ने बताया कई ऐसे दस्तावेज मिले है। इधर किंशुक ने भास्कर से कहा कि जांच के बाद सूचना पत्र मिलने पर उसका जवाब दूंगा।


काली कमाई से प्रापर्टी खरीदने का जुनून

लॉकडाउन के बाद कुलदीप ने उज्जैन में रेलवे स्टेशन के सामने प्लॉट खरीदा जिस पर होटल का निर्माण करवा रहा है। ऐसी कई जगह उसने जमीन खरीदकर काली कमाई निवेश की है। कुलदीप की बीमा एजेंट मां अनिता का कहना था कि आपकी इस कार्रवाई से क्या समझते है मेरे बेटे का रूतबा कम हो जाएगा। निरीक्षक वर्मा ने कहा कि रूतबा कम होगा या नहीं लेकिन उसकी नौकरी बच जाए यहीं बहुत है।

भ्रष्टाचार का ये पौधा पनपा कैसे? जड़ खोदना होगी

छोटी सी नगर पालिका का सीएमओ। 12 साल की नौकरी। 1600 रुपए के वेतन से शुरुआत और अब 34 हजार… सबकुछ जोड़ा जाए तो भी 22 से 25 लाख तक ही पहुंचेंगे, लेकिन ये तो धनकुबेर निकला। 6 करोड़ से ज्यादा तो एक ही दिन में सामने आ चुके हैं। अभी आंंकड़ा 10 करोड़ के ऊपर जा सकता है। ...लेकिन इतनी मोटी कमाई कर कैसे ली? वो भी इतने कम समय के कार्यकाल में।

इतने मकान, जमीन, संपत्ति बनती जा रही थी, कोई भी नजर नहीं डाल पाया। शह कहां से मिल रही है। कौन सींच रहा है भ्रष्टाचार के ऐसे पौधों को। बिना मिलीभगत के तो कुछ भी मुमकिन नहीं है। एक सीएमओ खुद की फर्म बनाकर ठेके ले लेता है, माल सप्लाय हो जाता है। भुगतान भी हो रहा है लेकिन किसी ने देखा तक नहीं या देखकर भी अनदेखा करने के लिए जिम्मेदार भी उपकृत हुए हैं। ये सबकुछ खंगालने योग्य है। अब एक पकड़ में आया है तो दूसरे, तीसरे को पकड़कर चेन निकाली जानी चाहिए।

ये तो बात हुई एक सीएमओ की। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की तो रेस लगी हुई है। कौन कितना ज्यादा माल कमाएगा? एक-दो नहीं, ऐसे किस्सों की फाइलें थप्पी में जमी हैं। उज्जैन में कुछ समय पहले रिश्वत लेते पटवारी पकड़ाए थे। तब तो यह हवाला तक दिया गया था कि लॉकडाउन के कारण कम ले रहा हूं, वरना इतने छोटे काम नहीं करता। यानी बिना मोटे लेनदेन के वे कुछ होने नहीं देते।

अब उज्जैन नगर निगम के एक ठेकेदार की मौत ने भी भ्रष्टाचार की कड़ी को जिंदा किया है। बताते हैं ऊपर से नीचे तक सभी को बांटे बिना बात नहीं बनती है। इसका खामियाजा जनता भुगतती है। उसकी कमाई का एक हिस्सा रिश्वत में बंट जाता है। मूल काम उसकी आधी राशि का हो पाता है। ये तो एक उदाहरण है। ऐसे कई भ्रष्टों की भेंट जनता चढ़ती आ रही है।

जिन निकायों में कंगाली बताकर विकास के काम तक रोके जा रहे हैं, वहां विकास ऐसे भ्रष्टों का हो रहा है। तीन दिन पहले पीडब्ल्यूडी के 11 अधिकारियों-कर्मचारियों पर लोकायुक्त ने ही शिकंजा कसा। उसमें भी मूल जड़ भ्रष्टाचार की ही थी। किस-किस के किस्से गिने जाएं। भ्रष्टाचार के पौधे हर तरफ सींचे जा रहे हैं। तंत्र में बैठे लोग ही इसे आगे बढ़ा रहे हैं। जनता की गाढ़ी कमाई का खाद बनाकर सबकुछ निगले जा रहे हैं। लेकिन अब इसकी जड़ खोदने का समय आ गया है। भ्रष्टाचार के ऐसे पौधों के पोषक तत्वों को खोजा जाए। जब तक उन्हें सबक नहीं सिखाया जाएगा, ये पौधा यूं ही विशाल वृक्ष बनकर सामने आता जाएगा।